उन्होंने एक विशेष इन्टरव्यू में जो मंगलवार की रात प्रसारित हुआ, 33 दिवसीय युद्ध के शुरु होने के बारे विस्तार से बताया।
जरनल क़ासिम सुलैमानी ने लेबनान पर ज़ायोनी शासन के हमले के एक सप्ताह बाद वरिष्ठ नेता की उपस्थिति में ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अपनी बैठक का ब्योरा देते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इस बैठक की समाप्ति और मेरी रिपोर्ट सुनने के बाद कहा कि मैं समझता हूं कि इस युद्ध में जीत, ख़ंदक़ के युद्ध की जीत की तरह होगी।
जरनल क़ासिम सुलैमानी ने अपने लेबनान पहुंचने और हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह के लिए वरिष्ठ नेता के नसीहतों को पहुंचाने की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस संदेश ने हिज़्बुल्लाह के जवानों में नई जान फूंक दी और प्रतिरोधकर्ताओं को यह विश्वास हो गया कि जीत उन्हीं की है।
जरनल क़ासिम सुलैमानी ने 33 दिवसीय युद्ध में हिज़्बुल्लाह की कुछ तकनीकों की ओर संकेत करते हुए कहा कि अन्य युद्धों के विपरीत जिनमें सबसे आगे मिट्टी हटाने के लिए एक बुल्डोज़र हुआ करता था, इस युद्ध में आगे कोई बुल्डोज़र नहीं था बल्कि हर जगह एक बुल्डोज़र थी।
ईरान के इस वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण के समय इस्राईल की नौसेना को दूर करने के लिए इस्राईली युद्धपोत पर हिज़्बुल्लाह का पहला मीज़ाइल हमला, इस अभियान का यादगार लमहा था।
जरनल सुलैमानी ने युद्ध की समाप्ति की ओर संकेत करते हुए कहा कि क़तर के तत्कालीन विदेशमंत्री ने जान बोल्टन और संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्राईल के राजदूत से मुलाक़ात की। उन्होंने कहा कि इस्राईल अपनी समस्त पूर्व शर्तों को छोड़कर हिज़्बुल्लाह की शर्तें मानने पर मजबूर हुआ और युद्ध विराम स्वीकार किया यह हिज़्बुल्लाह के लिए बहुत बड़ी जीत थी।